Monday, July 6, 2026

यम नचिकेता संवाद l कठोपनिषद् l


 


'श्रेय' यानी जो श्रेष्ठ हो, 'प्रेय' यानी जो प्रिय हो। उपनिषद् कहता है कि श्रेय और प्रेय में से चुनना हो तो सदैव श्रेय को चुनो. प्रेय की उपेक्षा करो। क्योंकि प्रेय में सुख है, किन्तु श्रेय में कल्याण है. प्रेय में लाभ है, किन्तु श्रेय में शुभता है. श्रेय में 'श्री' निहित है और प्रेय की अहर्निश कामना अन्तत: 'श्रीहीन' बना देती है.

यम ने नचिकेता से कहा था कि कुछ भी वरदान माँग ले. नचिकेता ने कहा, मुझे ब्रह्मविद्या चाहिए, जीवन और मृत्यु का रहस्य मुझे जानना है. तब यम ने क्या कहा....
जानने के लिए सुनिए.

No comments:

Post a Comment

Loving a Workaholic

  Ambition is undeniably magnetic. We often fall for the drive, the unrelenting passion, and the late-night hustle that promises a secure, s...